धर्म से पहले क्या था?
Sanātana: Ancient Civilized Scientific Way of Living
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हम पूछते हैं: धर्म शब्द कहाँ से आया? लेकिन इससे पहले एक अधिक मूल प्रश्न पूछा जाना चाहिए:
जब “धर्म” शब्द नहीं था, तब क्या था?
तब भी सूर्य उदय होता था। ऋतुएँ बदलती थीं। जल प्रवाहित होता था। वनस्पतियाँ उगती थीं। जीवन जन्म, विकास, क्षय और मृत्यु के क्रम से गुजरता था। मनुष्य प्रकृति से भोजन, औषधि, आश्रय, परिवार, सहयोग और संतुलन सीखता था।
अर्थात शब्द बाद में आए, लेकिन जीवन और प्रकृति की व्यवस्था पहले से मौजूद थी। मेरी परिभाषा में उसी शाश्वत जीवन-व्यवस्था को कहा जा सकता है: Sanātana — Ancient Civilized Scientific Way of Living।
और उसका केंद्रीय प्रश्न है:
मैं कौन हूँ?
1. नाम से पहले वास्तविकता थी
किसी नियम का नाम बाद में रखा जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह नियम नाम से पहले अस्तित्व में नहीं था।
- गुरुत्वाकर्षण शब्द से पहले भी वस्तुएँ नीचे गिरती थीं।
- वनस्पति-विज्ञान से पहले भी मनुष्य पौधों को देखता और उनके प्रभाव पहचानता था।
- चिकित्सा-विज्ञान के औपचारिक नाम से पहले भी शरीर, भोजन, रोग और उपचार के संबंधों का observation होता था।
उसी प्रकार, धर्म शब्द से पहले भी जीवन को धारण करने वाली प्राकृतिक व्यवस्था थी। धर्म ने उस व्यवस्था को बनाया नहीं — धर्म उस व्यवस्था को पहचानने, समझने और जीवन में धारण करने की भाषा बना।
2. वैदिक चिंतन में ऋत और धर्म
वैदिक चिंतन में ऋत (Ṛta) प्राकृतिक, नैतिक और ब्रह्मांडीय क्रम की महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसे उस व्यापक व्यवस्था के रूप में समझा गया जिसके भीतर प्रकृति, समाज, सत्य और उत्तरदायित्व परस्पर जुड़े हैं।
ऋग्वेद में धर्माणि जैसे वैदिक रूप भी सुरक्षित हैं — उदाहरण के लिए ऋग्वेद 1.22.18 में “अतो धर्माणि धारयन्” मिलता है। ऋग्वेद स्वयं किसी एक लेखक की एककालिक पुस्तक नहीं, बल्कि अलग-अलग सूक्तों और ऋषि-परंपराओं से बनी संहिता है। भारत सरकार का Vedic Heritage Portal भी इसे अनेक पुराने और बाद के तत्वों वाला compilation बताता है।
इससे यह सिद्ध नहीं होता कि किसी निश्चित दिन ऋत का नाम बदलकर धर्म रख दिया गया। लेकिन एक conceptual relationship दिखाई देती है:
- ऋत — व्यापक प्राकृतिक और cosmic order
- धर्म — उस व्यवस्था को धारण करने वाला सिद्धांत और आचरण
3. Sanātana का अर्थ
Sanātana का अर्थ केवल “बहुत पुराना” नहीं है। इसका भाव है:
- जो नित्य है;
- जो किसी एक व्यक्ति के बनाने से शुरू नहीं हुआ;
- जो किसी साम्राज्य के समाप्त होने से समाप्त नहीं होता;
- जो किसी एक पुस्तक, संस्था या मत में सीमित नहीं;
- और जो जीवन तथा प्रकृति के मूल संबंधों की खोज करता है।
यहाँ Scientific का अर्थ प्रत्येक प्राचीन कथन को आधुनिक laboratory science घोषित करना नहीं है। इसका अर्थ है: observation; अनुभव; कारण और परिणाम की खोज; तर्क; तुलना; अभ्यास; पुनः परीक्षण; और जीवन में प्राप्त परिणामों का निरंतर अध्ययन।
4. Sanātana का केंद्रीय प्रश्न
Religion सामान्यतः पूछ सकता है: आप किस belief को मानते हैं? Panth पूछ सकता है: आप किस मार्ग पर चलते हैं? लेकिन Sanātana की सबसे गहरी खोज व्यक्ति को स्वयं की ओर मोड़ती है:
मैं कौन हूँ?
- क्या मैं केवल शरीर हूँ?
- क्या मैं अपने विचार हूँ?
- क्या मैं अपनी सामाजिक पहचान हूँ?
- क्या मैं अपनी इच्छाओं और भय का योग हूँ?
- मन, आत्मा, चेतना, प्रकृति और ब्रह्मांड के बीच संबंध क्या है?
यही प्रश्न योग, ध्यान, उपनिषद्, दर्शन और आत्म-अन्वेषण की अनेक धाराओं का केंद्र बना।
5. Religion, Panth और Ism से पहले
आज मानव समाज को अनेक categories में समझा जाता है: religion; sect; panth; denomination; ideology; और “ism।” लेकिन प्रकृति इन categories से पहले थी। जीवन को तब भी:
- जल की आवश्यकता थी;
- भोजन की आवश्यकता थी;
- सहयोग की आवश्यकता थी;
- परिवार और समाज की आवश्यकता थी;
- मर्यादा और उत्तरदायित्व की आवश्यकता थी;
- और प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता थी।
इसलिए organized belief systems से पहले भी way of living था। नामित धर्म से पहले भी धारण करने वाला व्यवहार था।
6. Nature से बना, Nature के लिए
Sanātana की दृष्टि में मनुष्य प्रकृति से बाहर खड़ा स्वामी नहीं, बल्कि उसी व्यापक तंत्र का हिस्सा है। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, ऋतु, वनस्पति, पशु, शरीर, मन और चेतना — ये अलग-अलग compartments नहीं, बल्कि एक परस्पर संबंधित जीवन-व्यवस्था हैं।
इसीलिए Sanātana Nature से निकला observation है; Nature के साथ जीने का discipline है; और Nature की निरंतरता के प्रति उत्तरदायित्व है।
धर्म से पहले अधर्म नहीं था। धर्म से पहले वह प्राकृतिक व्यवस्था थी, जिसे धारण करने के लिए धर्म की भाषा विकसित हुई।
Religion, panth और ism मनुष्य द्वारा निर्मित categories हैं। Nature उनसे पहले थी। जीवन उनसे पहले था। चेतना की खोज उनसे पहले थी।
धर्म ने Sanātana को जन्म नहीं दिया। Sanātana जीवन-व्यवस्था ने धर्म को अर्थ दिया।
Sanātana Question मैं कौन हूँ?
· ऋग्वेद 1.22.18 — “अतो धर्माणि धारयन्” (Ṛta / धर्माणि)
· Vedic Heritage Portal, Govt. of India — Ṛgveda as compilation
· GRETIL — Ṛgveda Saṃhitā digital text
· Encyclopedic sources on Ṛta (cosmic / moral order)
— Ankur Grover · Global Observation Archive